प्रवर्तन निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश के ब्यास नदी और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित यमुना नदी में अवैध खनन से जुड़े मामले में गियान चंद और अन्य 7 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. ये चार्जजीट विशेष पीएमएलए कोर्ट, गाजियाबाद में दायर की गई, जिसने 17 जनवरी 2025 को इस पर संज्ञान लिया.

कैसे हुआ मामला दर्ज?
यह मामला ब्यास नदी और यमुना नदी के नदी तट पर अवैध रेत और खनिज खनन के संबंध में मिली शिकायतों और खुफिया जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया था. ईडी ने अपनी जांच हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और ऊना जिलों में कई पुलिस स्टेशनों द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की. इन एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सरकारी जमीन पर अवैध खनन गतिविधियां हो रही थीं, जहां टिप्पर, पोकलेन, जेसीबी और ट्रैक्टर जैसे वाहन अवैध खनन में शामिल पाए गए. इन वाहनों के जरिए अवैध रूप से निकाले गए खनिजों को पत्थर क्रशर तक पहुंचाया जा रहा था.

इसके अलावा, यूपी पुलिस के बेहट थाना, सहारनपुर में 1 नवंबर 2024 को एक और एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें गियान चंद और अन्य पर मुकदमा दर्ज किया गया. इस मामले में यूपी पुलिस की एक और एफआईआर को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है.

गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की
इससे पहले, 18 नवंबर 2024 को ईडी ने गियान चंद और उसके साथी संजय कुमार उर्फ संजय धीमान को गिरफ्तार किया था. जांच के दौरान ईडी ने 3 जनवरी 2025 को करीब 4.9 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया.

क्या मिला जांच में?
जांच के दौरान ईडी ने 12 जगहों पर छापेमारी की, जिसमें गियान चंद और उसके सहयोगियों के ठिकाने भी शामिल थे. छापों में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सबूत मिले, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि गियान चंद और उसके गिरोह ने ब्यास नदी से लेकर यमुना नदी तक अवैध खनन किया. ईडी के अनुसार, अवैध खनन से मिले पैसे का उपयोग जमीन खरीदने, खनन मशीनरी (जैसे ट्रक, टिप्पर, जेसीबी, क्रशर आदि) खरीदने में किया गया.

क्या होगा आगे?
अब जब पीएमएलए कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान ले लिया है, तो आगे की सुनवाई में गियान चंद और अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होने की संभावना है. ईडी मामले की और गहराई से जांच कर रही है और अन्य संलिप्त लोगों की भी पहचान कर सकती है.

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